साक्षात्कार के लिए हिंदी साहित्य से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न श्रृंखला-3

प्रश्न : समकालीन कविता क्या है?
उत्तर :
आठवें–नौवें दशक (1980 के बाद) से लेकर वर्तमान समय तक लिखी जा रही कविता को समकालीन कविता कहा जाता है। यह कविता अपने समय की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक वास्तविकताओं के प्रति अत्यंत सजग है और आम जनजीवन के अनुभवों को अभिव्यक्त करती है।
प्रश्न : समकालीन कविता की प्रमुख प्रवृत्तियाँ क्या हैं?
उत्तर :
समकालीन कविता की प्रमुख प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं—
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व्यवस्था-विरोध और सत्ता की आलोचना
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जीवन-धर्मिता और यथार्थबोध
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जातिवाद, साम्प्रदायिकता और पृथकतावाद का विरोध
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नारी चेतना और लैंगिक समानता
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श्रम, रोटी, बेरोज़गारी और आम आदमी की पीड़ा
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लोकतंत्र, मानवाधिकार और प्रतिरोध की चेतना
प्रश्न : कुछ प्रमुख समकालीन कवियों के नाम बताइए।
उत्तर :
राजेश जोशी, मंगलेश डबराल, अरुण कमल, आलोक धन्वा, गोरख पांडेय, विष्णु नागर, केदारनाथ सिंह, असद ज़ैदी।
प्रश्न : किसी समकालीन कवि की कविता सुनाइए।
विष्णु नागर (अंश)
रोटी का सवाल उठाया जा रहा है
लोकसभा में लड़ा जा रहा है
रोटी का सवाल उलझ गया है
लोकसभा में सुलझाया जा रहा है
रोटी का सवाल सुलझ चुका है
राष्ट्रगीत गाया जा रहा है
राष्ट्रगीत गाया जा चुका है
रोटी का सवाल भुलाया जा रहा है
➡️ यह कविता लोकतंत्र में आम आदमी के बुनियादी सवालों की उपेक्षा को उजागर करती है।
गोरख पांडेय – ‘भरूआ वसंत’ (अंश)
ग़ुस्से को विदा करो
हाथ जोड़ लो अदब से
सिर झुकाते हुए तालियाँ बजाना सीख लो
जबकि मौसम
ख़ून की तरह रंगीन हो रहा है
उठो, वसंत आ रहा है
➡️ यह कविता सत्ता-प्रायोजित उत्सवधर्मिता पर तीखा व्यंग्य है।
अरुण कमल – ‘सब उधार का’ (अंश)
मांगा सारा नमक, तेल, हींग, हल्दी तक
सब कर्ज़ का
अपना क्या है इस जीवन में
सब तो लिया उधार
सारा लोहा उन लोगों का
अपनी केवल धार
➡️ यह कविता उपभोक्तावादी समाज में मनुष्य की असहाय स्थिति को दर्शाती है।
प्रश्न : समकालीन हिंदी उपन्यास क्या है?
उत्तर :
बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से लेकर आज तक लिखे गए उपन्यासों को समकालीन हिंदी उपन्यास कहा जाता है। ये उपन्यास अकेलेपन, असंतोष, पहचान-संकट, महानगरीय जीवन, टूटते पारिवारिक मूल्य और आंतरिक द्वंद्व को केंद्र में रखते हैं।
प्रश्न : कुछ समकालीन हिंदी उपन्यासकारों के नाम बताइए।
उत्तर :
प्रश्न : किसी समकालीन महिला हिंदी उपन्यासकार का नाम बताइए।
उत्तर :
कृष्णा सोबती – सूरजमुखी अंधेरे के
(इसके अतिरिक्त: मन्नू भंडारी, मैत्रेयी पुष्पा, अलका सरावगी)
प्रश्न : समकालीन कहानी क्या है?
उत्तर :
नौवें दशक (1980 के बाद) से लेकर वर्तमान समय तक लिखी गई कहानियों को समकालीन कहानी कहा जाता है। इसमें बदलते सामाजिक यथार्थ और व्यक्ति की जटिल मानसिक स्थितियों को उकेरा गया है।
प्रश्न : समकालीन कहानी की विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर :
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जटिल और व्यापक यथार्थ की सीधी अभिव्यक्ति
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शिल्प और भाषा में नवीनता
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हाशिए के समाज की उपस्थिति
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सत्ता, बाजार और मीडिया की आलोचना
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व्यक्ति की आंतरिक टूटन और संघर्ष
प्रश्न : कुछ समकालीन हिंदी कहानीकारों के नाम बताइए।
उत्तर :
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संजय (भोजपुर, बिहार) – कामरेड का कोट
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उदय प्रकाश – तिरिछ, और अंत में प्रार्थना
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मिथिलेश्वर (भोजपुर, बिहार) – बाबूजी, ज़िंदगी का एक दिन
प्रश्न : कुछ समकालीन महिला कहानीकारों के नाम एवं उनकी कहानियाँ बताइए।
उत्तर :
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मृदुला गर्ग – कितनी कैदें, टुकड़ा-टुकड़ा आदमी, डैफ़ोडिल जल रहे हैं
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राजी सेठ – तुम भी
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निरुपमा सेवती – बँटता हुआ आदमी